
ഗസല് ഇഷ്ടപെടുന്നവര്ക്കായി ഗുല്സാറിന്റെ
പ്രണയഭരിതമായ വരികള് ഇവിടെ ചേര്ക്കുന്നു..
फुलों की तरह लब खोल कभी
ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी
अलफ़ाज़ परखता रेहता है
आवाज़ हमारी तोल कभी
अन्मोल नहीं लेकिन फिर भी
पूछो तो मुफ़्त का मोल कभी
खिड़की में कटी है सब राते
कुछ चौर्स थीं, कुछ गोल कभी
ये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरह
हो जाता है डांवां डोल कभी
ഇതു കേള്ക്കുവാന് ഇവിടെ ക്ലിക്കുക
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February 03, 2008
फुलों की तरह
എഴുതിയത്
Gopan | ഗോപന്
at
18:51
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Labels: gulzar, jagjit singh
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